लक्ष्मणगढ़ में दिखा दुर्लभ वन्यजीव एशियन पाम सिविट:रिहायशी इलाके के एक घर में छिपा, वन विभाग की कोशिश के बाद भी नहीं हुआ रेस्क्यू
लक्ष्मणगढ़ में दिखा दुर्लभ वन्यजीव एशियन पाम सिविट:रिहायशी इलाके के एक घर में छिपा, वन विभाग की कोशिश के बाद भी नहीं हुआ रेस्क्यू
लक्ष्मणगढ़ : लक्ष्मणगढ़ कस्बे में रविवार सुबह एक घर में दुर्लभ एशियन पाम सिविट (Asian Palm Civet) देखा गया। यह वन्यजीव सुबह करीब 8 बजे पंचायत समिति के पास नटवरलाल झांकल के घर में छिपा मिला। परिजनों ने तुरंत वन्यजीव प्रेमी कैलाश सैनी को इसकी सूचना दी।
रिहायशी इलाके में घुसा एशियन पाम सिविट
सूचना मिलते ही कैलाश सैनी मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू के प्रयास शुरू किए। हालांकि, सिविट वहां से निकलकर पास के एक नोहरे में जा छिपा। काफी तलाश के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिला। दोपहर में जानकारी मिली कि वह पास ही के एक अन्य घर में छिपा है, जिसके बाद वन विभाग को सूचित किया गया।
वन विभाग के कर्मचारी जाल लेकर मौके पर पहुंचे। कैलाश सैनी की टीम और वन विभाग के संयुक्त प्रयासों से उसे पकड़ने की कोशिश की गई, लेकिन वह फिर से निकलकर पास के एक अन्य नोहरे में घुस गया। काफी देर तक खोजबीन के बावजूद उसे रेस्क्यू नहीं किया जा सका।
बिल्ली जैसा दिखता है सिविट
वन्यजीव प्रेमी कैलाश सैनी ने बताया- यह एशियन पाम सिविट है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘कब्र बिज्जू’ भी कहा जाता है। यह बिल्ली जैसा दिखने वाला एक जंगली स्तनधारी जीव है, जो अपनी प्रजाति में अलग है। इसका शरीर लंबा, पूंछ बड़ी, चेहरा नुकीला और आंखों के आसपास काले मास्क जैसा निशान होता है।

यह निशाचर और सर्वाहारी होता है, जो फल, कीड़े-मकोड़े, छोटे पक्षी, अंडे तथा कभी-कभी छोटे जानवर या मृत जीव भी खाता है। सैनी ने यह भी बताया कि इसी प्रजाति से जुड़ी प्रसिद्ध कॉफी कॉपी लुवाक (Kopi Luwak) विश्वभर में जानी जाती है।
यह आमतौर पर शर्मीले स्वभाव का होता है और मनुष्यों से दूर रहना पसंद करता है, लेकिन भोजन की तलाश में कभी-कभी आबादी वाले क्षेत्रों के पास भी दिखाई दे सकता है। यह रेबीज का संभावित वाहक भी माना जाता है।
लक्ष्मणगढ़ में पहली बार दिखा एशियन पाम सिविट
राजस्थान में इससे पहले कोटा और अलवर क्षेत्र में इसके देखे जाने की जानकारी सामने आई थी, जबकि लक्ष्मणगढ़ में यह पहली बार दिखाई दिया है। कैलाश सैनी ने आमजन से अपील की है कि यदि यह जीव कहीं दिखाई दे तो स्वयं पकड़ने का प्रयास न करें और तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
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