यूजीसी के नए नियमों पर विप्र फाउंडेशन ने जताई आपत्ति:बोले-भेदभाव और कानून के दुरुपयोग की आशंका, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
यूजीसी के नए नियमों पर विप्र फाउंडेशन ने जताई आपत्ति:बोले-भेदभाव और कानून के दुरुपयोग की आशंका, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
चिड़ावा : चिड़ावा में विप्र इंडिया वेलफेयर फाउंडेशन ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा प्रस्तावित नए नियमों और विधेयकों का विरोध किया है। सोमवार को फाउंडेशन ने राष्ट्रपति के नाम उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को एक ज्ञापन सौंपा। संस्था का तर्क है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं और संवैधानिक समानता के सिद्धांतों के विपरीत हैं।
झूठी शिकायत पर कार्रवाई की मांग
फाउंडेशन ने अपने ज्ञापन में मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज की है। पहली आपत्ति यह है कि जातिगत भेदभाव के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन झूठे या दुर्भावनापूर्ण आरोपों के मामलों में फंसाने वालों के खिलाफ भी सख्त सजा का प्रावधान अनिवार्य है।
संस्था ने समानता के अधिकार पर भी चिंता व्यक्त की। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी पीड़ित पक्ष में शामिल किया जाता है, तो इससे सामान्य वर्ग को पहले से ही ‘दोषी’ मानने की धारणा बनती है, जो न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। फाउंडेशन ने यह भी बताया कि वर्ष 2012 के पूर्ववर्ती नियमों में झूठे आरोपों पर दंड का प्रावधान था, जिसे नए नियमों से हटा दिया गया है।
विप्र इंडिया वेलफेयर फाउंडेशन के अनुसार, इन नियमों से शिक्षण संस्थानों में भय, असुरक्षा और आपसी तनाव का वातावरण पैदा हो सकता है। इससे शिक्षा की मूल भावना और शैक्षणिक माहौल प्रभावित होगा।
फाउंडेशन ने राष्ट्रपति से कई मांगें की हैं। इनमें प्रस्तावित यूजीसी नियमों को वर्तमान स्वरूप में लागू न करना, इस विषय पर शिक्षाविदों, छात्रों और सामाजिक संगठनों के साथ व्यापक संवाद करना, किसी भी जांच समिति में सभी वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल करना और कानून में पारदर्शिता व निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट प्रावधान जोड़ना शामिल है।
इस अवसर पर सुभाष चंद्र, महेश कुमार शर्मा ‘आजाद’, अमर सिंह तंवर, मूलचंद शर्मा, सुनील शर्मा सहित संस्था के अन्य पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।
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