राजस्थान की नहरों में प्रवाहित जल को प्रदूषित होने से बचाया जाएः बृजेंद्र ओला
लोकसभा में प्रदुषित जल और सरसों की खरीद का मामला उठाया

झुंझुनूं : बुधवार को शून्य काल के दौरान सांसद बृजेंद्र ओला ने प्रदेश के 13 जिलों के निवासियों के दर्द को रखकर इसके लिए समाधान करने की मांग की। सांसद ने कहा कि पंजाब में प्रदूषित अपशिष्ट और औद्योगिक अपशिष्ट सतलज व उसकी सहायक नदियों में प्रवाहित हो रहा है। पंजाब से उपरोक्त नदियों का पानी विभिन्न परियोजनाओं के तहत राजस्थान के 13 जिलों में आता है। वर्तमान में तीन अलग-अलग योजनाओं की बात करें तो इनसे राजस्थान के झुंझुनूं समेत 13 जिलों को पानी मिल रहा है। लेकिन यह पानी प्रदूषित अपशिष्ट और औद्योगिक अपशिष्ट से प्रदुषित है।
उन्होंने सदन में बताया कि उनकी सरकार के वक्त एनजीटी में यह बात उठाई गई थी। इसके बाद एनजीटी ने प्रदुषित पानी को रोकने के लिए आदेश दिए थे। करीब 650 करोड़ रूपए की योजना भी बनाई गई थी। लेकिन यह अभी तक धरातल पर नहीं उतरी है। लगातार यह प्रदूषित पानी सप्लाई हो रहा है। जिससे अनेक बीमारियां, खासकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी फैल रही हैं।
सरसों की खरीद एमएसपी की कानूनी गारंटी देते हुए खरीदी जाएं
इसी तरह, सांसद ओला ने बुधवार को नियम 377 के तहत सरसों खरीद का मामला लोकसभा में उठाया। उन्होंने कहा कि संसदीय क्षेत्र झुंझुनूं सहित राजस्थान प्रदेश में सरसों का उत्पादन अत्यधिक मात्रा में होता है। देश का लगभग 48 प्रतिशत सरसों का उत्पादन अकेले राजस्थान में होता है। किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम नहीं मिल रहा, जिससे वे आर्थिक संकट में घिर रहे हैं। बाजार में सरसों के दाम गिरते जा रहे हैं। जिससे बिचौलियों को फायदा हो रहा है और किसान घाटे में जा रहे हैं। साथ ही सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के बिना ही किसानों की उपज खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर है। जिससे अन्नदाता ठगा हुआ महसूस कर रहा है। खरीद केंद्र दूर होने के साथ साथ वहां पर लंबी लंबी लाइनें लगती हैं। उसके बावजूद किसानो से उनकी फसल भी नहीं खरीदी जाती हैं।