रॉयल रेजीडेंसी में शॉर्ट सर्किट से लगी आग से मची अफरा तफरी, देवदूत बनकर आग की लपटों में कूदा खाकी का लाल सतपाल…
धुआं, चीखें और सामने खड़ी थी मौत... अगर 'सतपाल' ने अपनी जान हथेली पर न रखी होती, तो आज श्मशान बन जाता पूरा अस्पताल और बैंक! बचाई सैकड़ों जिंदगियां!
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : आबिद खान
फतेहपुर : कहते हैं कि जब चारों तरफ मौत का साया मंडरा रहा हो और इंसान हिम्मत हार जाता है, तब ऊपर वाला किसी न किसी को मसीहा बनाकर जरूर भेजता है। शुक्रवार को फतेहपुर कस्बे के छतरिया बस स्टैंड पर स्थित ‘रॉयल रेजीडेंसी’ में जब अचानक शॉर्ट सर्किट से आग लगी, तो चीख-पुकार और अफरा-तफरी के बीच खाकी वर्दी में एक ऐसा ही मसीहा प्रकट हुआ। नाम है कांस्टेबल चालक सतपाल। एक ऐसा जांबाज, जिसने अपनी जान की परवाह किए बिना मौत के कुएं में छलांग लगा दी और एक बहुत बड़े और दर्दनाक हादसे को टाल दिया।

जब थम गईं थीं सबकी सांसें…
शुक्रवार का वो दिन जब रॉयल रेजीडेंसी में लगे एसी में शॉर्ट सर्किट हुआ और देखते ही देखते आग की विकराल लपटों ने फ्लैट को घेर लिया। इस बहुमंजिला इमारत में एक दर्जन से अधिक परिवार रहते हैं, नीचे का नजारा और भी खौफनाक था-वहां लाइफ लाइन अस्पताल था जहाँ मरीज थे, कई निजी बैंक, एटीएम और कैफे थे। आग की लपटें देखकर नीचे खड़े लोगों का कलेजा कांप उठा। अस्पताल के मरीजों की सांसें अटक गईं। उसी वक्त बस स्टैंड पर तैनात ट्रैफिक पुलिस के जवान दौलत सिंह ने बिना वक्त गंवाए कोतवाली पुलिस को सूचना दी। कोतवाली थाना प्रभारी तुरंत दलबल के साथ मौके पर पहुंचे, और आग पर काबू पाया गया।
मौत के सामने सीना तानकर खड़ा हो गया पुलिस का लाल सतपाल
”जब हर कोई अपनी जान बचाने को लेकर चिंतित था, तब कोतवाली थाने का यह जांबाज चालक, कांस्टेबल सतपाल, आग की उन खौफनाक लपटों की तरफ अकेले ही दौड़ पड़ा।” और रेलिंग पर लटकते हुए दूसरे रास्ते से आग की लपटों के सामने मुस्तैद हो गया । सतपाल ने न अपनी जान की परवाह की, न अपने परिवार का सोचा। उनके सामने सिर्फ एक ही लक्ष्य था-इमारत में फंसे लोगों और अस्पताल के मरीजों को बचाना। अपनी जान को हथेली पर रखकर सतपाल अग्निशमन यंत्र का पाइप लेकर सीधे आग के उस तांडव के बीच कूद पड़े। धुएं से दम घुट रहा था, आग के अंगारे बरस रहे थे, लेकिन सतपाल के कदम पीछे नहीं हटे। उन्होंने उस आग से लोहा लिया और आखिरकार उस पर काबू पाकर ही दम लिया। अगर सतपाल ने अपनी तत्परता और अद्वितीय साहस न दिखाया होता, तो आज अस्पताल और बैंकों का क्या हश्र होता, यह सोचकर ही रूह कांप जाती है।

इतिहास गवाह है: सतपाल ने हमेशा खाकी के फर्ज के लिए दांव पर लगाई अपनी जिंदगी
यह कोई पहली बार नहीं है जब सतपाल ने मौत के मुंह से जिंदगियां छीनी हों। फतेहपुर की मिट्टी गवाह है कि जब-जब इस कस्बे पर कोई विपदा आई, भले ही वो कोतवाली थाने का चालक हैं लेकिन हमेशा सतपाल ढाल बनकर खड़ा हो गया: बीते दिनों जब कोतवाली थाने के पास एक सीएनजी गाड़ी में आग लगी थी, तो वो किसी भी वक्त एक बड़े बम की तरह फट सकती थी। तब भी इसी जांबाज ने अपनी जान दांव पर लगाई और अग्निशमन यंत्र का पाइप लेकर अकेले ही बम रूपी गाड़ी पर चढ़ गए थे। और काबू पाया।

डूबती महिला की बचाई थी सतपाल ने जान :
जब कस्बे में बाढ़ जैसा पानी भर गया था और एक बेबस महिला मौत के आगोश में कार में समा रही थी, तब भी इसी लाल सतपाल ने अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर उसे डूबने से बचाया था।
सलाम कर रही है जनता, आखों में हैं आंसू और दिल में सम्मान
आज फतेहपुर कस्बे के हर कोने में, हर जुबान पर सिर्फ और सिर्फ कांस्टेबल चालक सतपाल का नाम है। सोशल मीडिया पर सतपाल की बहादुरी ट्रेंड कर रही हैं। लोग भावुक हैं, उनकी आंखों में आंसू हैं और दिल में इस वीर जवान के लिए सम्मान है। रॉयल रेजीडेंसी में रहने वाले परिवारों और अस्पताल के मरीजों के परिजन सतपाल को दुआएं देते नहीं थक रहे हैं।
खाकी वर्दी को गौरवान्वित करने वाले ऐसे वीर और मसीहा ‘सतपाल’ को जनमानस शेखावाटी न्यूज और पूरा देश सैल्यूट करता है। सलाम है सतपाल, आपकी जांबाजी और इंसानियत को! काबिले तारीफ हैं।
जब इस मामले में रेजीडेंसी की एनओसी से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए हमारी टीम ने नगरपरिषद अनिता खीचड़ से संपर्क करने की कोशिश की उन्हें कॉल किया तो उन्होंने हमेशा की तरह आज भी कॉल उठाना उचित नही समझा जिस से प्रतीत होता हैं कि कही न कही कोई बड़ी खामी रही होगी।
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