फतेहपुर विधानसभा के खोटिया और ठेडी में ‘सेवा शिविर 2026’ बना खानापूर्ति; एक ही समय पर दो जगह कैंप, अधिकारी ‘मानव या शक्तिमान’?
बिना अधिकारियों के ही सेवा शिविरों' की इति श्री! कैसे दूर होगी आमजन की समस्याएं..? ग्रामीण सेवा शिविर में अधिकारी नदारद
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अनिल शेखीसर
फतेहपुर : आमजन को उनके द्वार पर ही सभी प्रशासनिक समस्याओं से मुक्ति दिलाने के बड़े-बड़े दावों के साथ राजस्थान सरकार द्वारा संचालित ‘ग्रामीण व शहरी सेवा शिविर 2026’ धरातल पर प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। सरकार ने इस अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लाखों रुपये के होर्डिंग्स और बैनर तो लगवा दिए, ताकि जनता जागरूक होकर इसका लाभ उठा सके। लेकिन फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में अधिकारियों की सुस्ती और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण ये शिविर महज ‘कागजी खानापूर्ति’ बनकर रह गए हैं।
ऐसा ही एक चौंकाने वाला नजारा आज फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र की खोटिया ग्राम पंचायत और ठेडी में देखने को मिला, जहां आयोजित शिविर से उपखंड अधिकारी (एसडीएम) और ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) जैसे मुख्य जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह नदारद रहे। हालांकि, मौके पर अतिरिक्त बीडीओ की मौजूदगी की बात सामने आई है, लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि जहां मुख्य और सीनियर अधिकारी ही गायब हों, वहां सरकार की मंशा के अनुरूप आमजन को मौके पर त्वरित राहत कैसे मिलेगी?
एक ही दिन में दो-दो कैंप: अजीबोगरीब समय सारिणी अधिकारी ‘मानव’ या ‘शक्तिमान’?
प्रशासनिक अदूरदर्शिता का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि एक ही दिन और एक ही समय पर खोटिया और ठेडी जैसी दो अलग-अलग ग्राम पंचायतों में शिविरों का आयोजन रख दिया गया। अब सवाल यह उठता है कि यह किस ‘महान’ प्रशासनिक दिमाग की उपज है? क्या कोई भी अधिकारी एक ही समय में दो अलग-अलग स्थानों पर भौतिक रूप से उपस्थित रह सकता है? क्या प्रशासन अधिकारियों को इंसान नहीं, बल्कि कोई ‘शक्तिमान’ समझता है जो पलक झपकते ही एक जगह से दूसरी जगह प्रकट हो जाए?
जब सवाल पर बिफरीं प्रशासनिक अधिकारी
शिविर में अनुपस्थिति को लेकर जब जनमानस शेखावाटी न्यूज के पत्रकार ने उपखंड अधिकारी से संपर्क साधा, तो उनका रुख सहयोगात्मक होने के बजाय आक्रामक नजर आया।
एसडीएम (रामगढ़) भारती फूल फकर का पक्ष:
“मैं खोटिया और ठेडी, दोनों ही जगह (शिविर में) मौजूद थी। आप अपनी नॉलेज को अपडेट कीजिए और सही जानकारी जुटाइए।
रिपोर्टर : “मैडम, हमने पूरी तरह सही और पुख्ता जानकारी जुटाई है। हम वही मोजूद थे हमारे पास इस बात के ठोस प्रमाण (एविडेंस) मौजूद हैं कि आप शिविर के दौरान वहां उपस्थित नहीं थीं।”
एसडीएम की प्रतिक्रिया “ठीक है, फिर देख लीजिए अपने हिसाब से।
एक जिम्मेदार प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी का ऐसा गैर-जिम्मेदाराना और चुनौतीपूर्ण जवाब यह साफ बयां करता है कि धरातल पर जनता के प्रति जवाबदेही को लेकर अधिकारी कितने गंभीर हैं।
“कमियां दुरुस्त होंगी, पत्रकार साथी हमें अवगत कराते रहें” आपकी जागरूकता अच्छी हैं। – श्रवण चौधरी
इस पूरे घटनाक्रम और जनता की परेशानियों पर जब फतेहपुर से भाजपा प्रत्याशी श्रवण चौधरी से बात की गई, तो उन्होंने सरकार का बचाव करते हुए सकारात्मक आश्वासन दिया।
श्रवण चौधरी (भाजपा प्रत्याशी, फतेहपुर) का पक्ष:
“हमारे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी एक बेहद साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार से उठकर इस मुकाम तक आए हैं। उन्हें एक आम आदमी की पीड़ा और समस्याओं का बखूबी अहसास है। आज दो जगहों पर कैंप का आयोजन कर आमजन की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया गया है। रही बात कमियों की, तो अगर कहीं कोई कमी रही है, तो उसे बिल्कुल दुरुस्त किया जाएगा। आप जैसे जिम्मेदार पत्रकार साथी जब सजग रहेंगे और हमें ऐसी कमियों से अवगत कराते रहेंगे, तो समस्याओं का समाधान निश्चित तौर पर होगा।”
यक्ष प्रश्न: विज्ञापन चमके, पर जनता कब तक भटकेगी?
सरकार की नीतियां और मुख्यमंत्री की मंशा निसंदेह जनहित में है, लेकिन जब तक फील्ड में बैठे अधिकारी एयर-कंडीशनर कमरों से बाहर निकलकर धरातल पर मुस्तैदी नहीं दिखाएंगे, तब तक ऐसे ‘सेवा शिविर’ केवल बजट ठिकाने लगाने का जरिया ही बने रहेंगे। देखना यह है कि इस गंभीर लापरवाही के बाद क्या उच्च प्रशासन फतेहपुर के इन शिविरों की सुध लेता है या फिर जनता ऐसे ही ‘राम भरोसे’ भटकती रहेगी।
देश
विदेश
प्रदेश
संपादकीय
वीडियो
आर्टिकल
व्यंजन
स्वास्थ्य
बॉलीवुड
G.K
खेल
बिजनेस
गैजेट्स
पर्यटन
राजनीति
मौसम
ऑटो-वर्ल्ड
करियर/शिक्षा
लाइफस्टाइल
धर्म/ज्योतिष
सरकारी योजना
फेक न्यूज एक्सपोज़
मनोरंजन
क्राइम
चुनाव
ट्रेंडिंग
Covid-19






Total views : 2241795

