इस्लामपुर गांव का नाम बदलने के विरोध में रैली:बोले- भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब को बचाना है; श्रीरामपुर करने के प्रयास में विवाद
इस्लामपुर गांव का नाम बदलने के विरोध में रैली:बोले- भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब को बचाना है; श्रीरामपुर करने के प्रयास में विवाद
झुंझुनूं : झुंझुनूं का ऐतिहासिक गांव इस्लामपुर इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। दरअसल, इस्लामपुर गांव का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने के प्रयासों के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है।
इस्लामपुर के बैनर तले ग्रामीणों ने अंबेडकर पार्क से एकत्रित होकर आक्रोश रैली निकाली। जो विभिन्न मार्गों से होती हुई कलेक्ट्रेट पहुंची। रैली में शामिल तमाम लोग अपने हाथों में तख्तियां लिए हुए थे और गांव की ऐतिहासिक पहचान को बनाएं रखने के पख में मांग कर रहे थे।
झुंझुनूं कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया
RLP के राजेन्द्र फौजी ने कहा- आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब को बचाने के लिए सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों, मेघवाल समाज के प्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक-सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर झुंझुनूं कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नाम यथावत रखने की मांग की।

सर्वसमाज और विभिन्न दलों का समर्थन
कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन के दौरान मेघवाल समाज, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के वरिष्ठ नेता राजेंद्र फौजी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खलील बुडाना, मुस्लिम न्याय मंच के संयोजक इमरान बडगूजर सहित काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
एक तरफ गीता, दूसरी तरफ कुरान रखो…
कलेक्ट्रेट के सामने हुई सभा में कांग्रेस नेता खलील बुडाना ने कहा- विधायक साहब ! यह देश हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी सद्भाव की मिसाल है। अगर आपमें सच्चाई है, तो कलेक्ट्रेट आइए। एक तरफ पवित्र कुरान और दूसरी तरफ पवित्र गीता रखिए। उन पर हाथ रखकर कह दीजिए कि ‘श्रीरामपुर’ नाम देश की आजादी से पहले का है… हम आज और इसी वक्त अपना सारा आंदोलन वापस ले लेंगे।
नाम बदलने से जनता का नुकसान होगा
वहीं RLP नेता राजेंद्र फौजी ने कहा- सरकार अपनी कमियों को छुपाने के लिए ऐसे हथकंडे अपनाती है। देश और राज्य में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह नाम बदलने का खेल शुरू किया गया है।
हम सब प्रभु श्रीराम का दिल से आदर-सम्मान करते हैं, लेकिन इस सियासी फैसले से व्यावहारिक नुकसान आम जनता का होगा। नाम बदलते ही गांव के लोगों को अगले 5 साल तक आधार कार्ड, जनआधार, वोटर आईडी और जमीन के राजस्व दस्तावेजों को सुधरवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे।
550 साल पुराना इतिहास
ज्ञापन में ग्रामीणों ने इस्लामपुर के ऐतिहासिक तथ्यों को प्रशासन के सामने रखा और बताया- यह नाम कोई नया नहीं है, बल्कि सदियों पुराना है। इस गांव की स्थापना सन 1459 में बहलोल खां के बहनोई इस्लाम खां सूर द्वारा की गई थी। तब से लेकर आज तक यहां सर्वसमाज प्रेम-भाव से रहता आया है।
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि कुछ असामाजिक और स्वार्थी तत्वों द्वारा राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए गांव का नाम बदलने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा- हम चाहते हैं कि हमारे गांव और समाज की जो सदियों पुरानी एकता और भाईचारे की परिपाटी है, वह वैसी ही बनी रहे।
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