आचार्य महाश्रमण के दर्शन एवं प्रवचन सुनने हर रविवार लाडनूं पहुंचते हैं बीदासरवासी, आध्यात्मिक वातावरण में उमड़ती है श्रद्धालुओं की आस्था
आचार्य महाश्रमण के दर्शन एवं प्रवचन सुनने हर रविवार लाडनूं पहुंचते हैं बीदासरवासी, आध्यात्मिक वातावरण में उमड़ती है श्रद्धालुओं की आस्था
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : गजराज शर्मा
बीदासर : जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य महाश्रमण के पावन सान्निध्य में दर्शन एवं प्रवचन का लाभ लेने के लिए बीदासर से प्रत्येक रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु लाडनूं पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं में आचार्यश्री के प्रति गहरी आस्था और श्रद्धा देखने को मिल रही है। सुबह से ही श्रद्धालु परिवार सहित लाडनूं के लिए रवाना होते हैं और धर्मसभा में शामिल होकर आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ प्राप्त करते हैं। आचार्य महाश्रमण के मंगल प्रवचन में संयम, सदाचार, अहिंसा, आत्मचिंतन, नैतिक जीवन, पारिवारिक संस्कार तथा मानव सेवा जैसे विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया। उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि अपने जीवन में अच्छे विचार, मधुर व्यवहार और संयम को अपनाए तो वह स्वयं के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने क्रोध, अहंकार, लोभ और द्वेष जैसी बुराइयों से दूर रहने तथा प्रेम, करुणा और सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
प्रवचन के दौरान धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ आचार्यश्री के विचारों को सुनते रहे। प्रवचन समाप्त होने के बाद श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दिया। बीदासर से आने वाले श्रद्धालुओं ने बताया कि वे लंबे समय से प्रत्येक रविवार को नियमित रूप से लाडनूं पहुंचकर आचार्य महाश्रमण के दर्शन एवं प्रवचन का लाभ लेते हैं। उनका कहना है कि आचार्यश्री के प्रेरणादायी विचार जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं तथा मानसिक शांति, आत्मबल और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं। यही कारण है कि हर सप्ताह बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे इस धर्मसभा में शामिल होने के लिए उत्साहपूर्वक लाडनूं पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं ने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे समय में आचार्य महाश्रमण के संदेश लोगों को नैतिकता, संस्कार, पारिवारिक एकता और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित कर रहे हैं। उनके प्रवचन केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक जीवन को भी नई दिशा देने वाले हैं। हर रविवार बीदासर से लाडनूं पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का यह धार्मिक सफर अब आस्था और विश्वास की एक सुंदर परंपरा बन चुका है। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे भविष्य में भी नियमित रूप से आचार्यश्री के दर्शन एवं प्रवचन का लाभ लेते रहेंगे तथा उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज में सद्भाव, सेवा और संस्कारों का संदेश फैलाने का प्रयास करेंगे।
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