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कारगिल योद्धा 13 साल से जंजीरों में कैद:मानसिक बीमारी से जूझ रहा पूर्व सैनिक, पत्नी ने मांगी मदद


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कारगिल योद्धा 13 साल से जंजीरों में कैद:मानसिक बीमारी से जूझ रहा पूर्व सैनिक, पत्नी ने मांगी मदद

कारगिल योद्धा 13 साल से जंजीरों में कैद:मानसिक बीमारी से जूझ रहा पूर्व सैनिक, पत्नी ने मांगी मदद

सूरजगढ़ : सूरजगढ़ क्षेत्र के बलौदा गांव में कारगिल युद्ध के एक पूर्व सैनिक शंकर सिंह पिछले 13 वर्षों से मानसिक बीमारी के कारण जंजीरों में कैद जीवन बिताने को मजबूर हैं। उनका परिवार इलाज और सरकारी सहायता के लिए गुहार लगा रहा है।

शंकर सिंह पिछले 27 साल से मानसिक बीमारी से जूझ रहे हैं। जिस जवान ने कारगिल की पहाड़ियों पर दुश्मनों से लोहा लिया था, आज वही अपने ही हालात से संघर्ष कर रहा है। परिवार के अनुसार, युद्ध से लौटने के बाद उनकी मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।

परिवार ने शुरुआत में सामान्य इलाज से लेकर बड़े अस्पतालों तक हर संभव प्रयास किया, लेकिन बीमारी बढ़ती गई। हालत इतनी खराब हो गई कि 13 साल पहले परिवार को मजबूरी में उन्हें जंजीरों से बांधना पड़ा। परिवार इलाज करवाते-करवाते आर्थिक रूप से टूट चुका है।

पत्नी बोलीं- देश के लिए लड़े, लेकिन आज कोई साथ नहीं

शंकर सिंह की पत्नी कमोद सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्हें न तो सेना से पर्याप्त सहायता मिली और न ही प्रशासन से कोई ठोस मदद। उन्होंने भावुक होकर कहा कि पति देश के लिए लड़े, लेकिन आज उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। उन्होंने बच्चों को भी बेहद कठिन हालात में पाला है।

कमोद सिंह ने प्रशासन और सेना से तत्काल मदद की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में शंकर सिंह का बड़े मानसिक अस्पताल में इलाज, सेना से पेंशन व विकलांगता भत्ता दिलाना, परिवार को आर्थिक सहायता और पूर्व सैनिक होने के नाते सम्मानजनक सहयोग शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते मदद नहीं मिली तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

इस संबंध में सैनिक कल्याण अधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि जानकारी जुटाई गई है। शंकर सिंह पेंशनर हैं और कारगिल युद्ध के दौरान मानसिक स्थिति खराब होने पर उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि परिवार को कोई समस्या है तो उसकी जांच कर समाधान किया जाएगा।

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